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अखिल भारतीय चमार समाज महासभा आपका हार्दिक स्वागत करती है

काफी बुद्धिजीवी आरोप लगाते हैं कि लोग जाति के नाम पर संगठन बना कर हम बाबा साहेब डा. भीम राव अम्बेडकर जी के मिशन के विरूध कार्य करते हैं। मैं उन व्यक्तियों से पुछना चाहता हूँ, कि इस देश में जाति व धर्म के नाम किसने सबसे पहले सभा का गठन कियाॽ मैं बताना चाहता हूँ कि सबसे पहले जाति व धर्म के नाम पर अपनी सभाऐं या संगठन बनाने का कार्य सशक्त या यू कहें कि उच्च वर्ग की जातियों ने ब्राहमण महासभा, राजपूत महासभा, अग्रवाल सभा व हिन्दू महासभा आदि का गठन कर, किया। इसी तरह पिछङा वर्ग व अनुसूचित जातियों (केवल चमार जाति को छोङकर) ने जाति आधारित संगठन बना कर अपनी जातियों की ताकत बढाने का कार्य करने लगे। 1994 में हरियाणा राज्य में कुछ अनुसूचित जातियों ने अपनी अपनी सभाओं के माध्यम से चमार समाज के विरूध कार्य करते हुए अनुसूचित जाति के आरक्षण को ए व बी श्रेणी में बांटने का कार्य किया। इसी प्रकार कई राज्यों में पिछङा वर्ग के आरक्षण को कई कई भागों में बांट दिया गया, उस समय किसी भी बुद्धिजीवी ने यह नहीं कहा कि जाति आधारित संस्थाओं को महत्व देकर इन्हे आपस में क्यों बांटा जा रहा है, तथा उस समय किसी को भी बाबा साहेब डा. भीम राव अम्बेडकर जी का मिशन क्यों नहीं दिखाई दिया। अब जब चमार समाज ने सबसे अन्त में अपने समाज के साथ होने वाले अत्याचारों व अन्याय को रोकने के लिए चमार समाज महासभा का गठन किया है तो हर किसी को (यहां तक कि चमार जाति के वे कई बुद्धिजीवी, जिनको चमार कहलाने में शर्म है) यह चमार समाज महासभा जातिवादी दिखाई देने लगी है।

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